काशी में बोले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: 'मृत्यु से बचने का नहीं, संवारने का करें प्रयास'
पानी बर्तन के अनुसार आकार धारण कर लेता है इसी प्रकार जीव भी जिस शरीर में जाता है उस अनुसार आकार धारण कर लेता है। शरीर को सांचे की तरह और मन को तरल पदार्थ की तरह से समझना चाहिए।
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